तू नौजवान है : विनीत शर्मा

किसने कहा तुझको की तुझे दुसरो के टुकड़ो पर पलना है, तू नौजवान है तुझे खुद से जीना मरना है
कहा तुझे तो करना था काम कई अच्छे अच्छे,
लेकिन हरकतों ने तेरी बतला दिया मेरे बच्चे
की आज कही तू सोया है ड्रग्स के आगोश में कही खोया है,
तू भूल गया घर की राह, परिवार तेरा आज रोया है
अब लगता है तुझको खुद के पैरो पे नहीं चलना है, तू नौजवान तो है लेकिन तुझे जीना नहीं सिर्फ मरना है
कहा तो देखि थी सबने की तू राह नए बनाएगा,
खुद तो छुएगा शिखरों को और दूजो को भी उकसाएगा
लेकिन तेरी हरकत ने, सबको शर्मशार किया है,
तूने न सिर्फ अपने को, अपनों को बदनाम किया है
ऐसी ही रहा तो तुझे बस इतना ही करना है, मार दे तू बस अपनों को तुझे टुकड़ो पे जो पलना है
अभी भी वक़्त है अर्जुन वापस आ जा अपनों में,
जहा प्यार मोहब्बत मिलती है जागते और सपनो में
वो धुएं का जीवन कब तक, तू ऐसी ही झेले जायेगा,
ऐसी ही कब तक तू सबसे मुँह छिपाएगा
कोसिस कर सब त्याग के तू फिर एक नौजवान तू बन,
जिसमे हो ताकत असीम ऐसी धरती की संतान तू बन
तू बन जा धरा का जीवन स्रोत तू बस इतना काम तो कर,
नित प्रतिदिन सम्मान में घर के थोड़ा सा ये काम तो कर
तू अब न जायेगा उस धुंध में बस इतना प्रण करना है, तू नौजवान है तुझे खुद से जीना मरना है
तुझमे अदम्य साहस है तू जोश से भरा एक सागर है,
जो सबकी प्यास बुझा सके तू तो ऐसी एक गागर है
फिर क्यों तुझे गैरो के, कदमो पे चलना है, तू नौजवान है तुझे खुद से जीना मरना है

Written by: Vineet Kumar Sharma

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