याद आयेंगे केदारनाथ सिंह : हिंदी के बड़े अध्याय की समाप्ति

कौन थे केदारनाथ :

केदारनाथ सिंह  का जन्म 1934 में बलिया के चकिया गाँव में हुआ .

वे हिन्दी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार थे और भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा उन्हें वर्ष 2013 का 49 वां ज्ञानपीठ पुरस्कार दिया गया.

कशी हिन्दू विश्वविद्यालय से MA किया, 1956 में.

MA के बाद 1964 में पीएचडी की उपाधि प्राप्त किया और गोरखपुर विश्वविद्यालय में अध्यापन शुरू किया.

बाद में JNU में हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त हुए.

उनके प्रमुख कविता संग्रहों में अभी बिल्कुल अभी, जमीन पक रही है, यहां से देखो, बाघ, अकाल में सारस, उत्तर कबीर और अन्य कविताएं, तालस्ताय और साइकिल प्रमुख हैं.

केदारनाथ सिंह ने ताना-बाना (आधुनिक भारतीय कविता से एक चयन), समकालीन रूसी कविताएं, कविता दशक, साखी (अनियतकालिक पत्रिका), शब्द (अनियतकालिक पत्रिका) का संपादन भी किया.

केदारनाथ सिन को ज्ञानपीठ के अलावा मैथिलीशरण गुप्त सम्मान, कुमारन आशान पुरस्कार, जीवन भारती सम्मान, दिनकर पुरस्कार, साहित्य अकादमी पुरस्कार और व्यास सम्मान भी मिला.

केदारनाथ सिंह की साहित्यिक यात्रा पर के बिक्रम सिंह ने एक फिल्म भी बनाई थी.

केदारनाथ सिंह ने अध्ययन के सिलसिले में एक लंबा वक्त बनारस में गुजारा. उनके साहित्य पर इस शहर का साफ असर दिखता है. कुछ कविताओं में उन्होंने बनारस को अलग तरह से देखा.

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