महिलाओं का सम्मान : किसी का धर्म, किसी का दिखावा

Bhavesh K Pandey | 2 जून 1995, लखनऊ गेस्ट हाउस में क्या हुआ, सभी को विदित है. मायावती को गुंडों और बदमाशों में जिन्हें कहा जाता है कि वो आजकल समाजवादी पार्टी के बड़े नेता हैं, उन्होंने गेस्ट हाउस के कमरे में मायावती को बंद कर दिया और बदसलूकी करने का प्रयास किया उनकी पूरी योजना मायावती को नुकसान पहुंचाने की थी, लोग बताते हैं कि इस बात की सूचना अटल बिहारी वाजपेयी जी को हुयी और उन्होंने ने भाजपा नेता ब्रह्मदत्त द्विवेदी से इस मामले में महिला होने के नाते मायावती को बचाने के लिए कहा.

Brahm Dutt Dwivedi with Atal Bihari Vajpeyi
Brahm Dutt Dwivedi with Atal Bihari Vajpeyi

ब्रह्मदत्त द्विवेदी बिना कुछ सोचे समझे, सभी राजनैतिक मतभेदों को भुलाते हुए गेस्टहाउस पहुंचे और असल जीवन के नायक की भांति मायावती को गेस्ट हाउस का दरवाजा तोड़ कर बचाया. अपने जीवनकाल में कभी भी ब्रह्मदत्त द्विवेदी ने इस बात का श्रेय नहीं लिया कि

उन्होंने मायावती के लिए क्या किया.

मायावती इसी एहसान के तले कई बार प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से ब्रह्मदत्त जी की मदद भी कीं, ब्रह्मदत्त द्विवेदी को अपनी इस बहादुरी का खामियाजा भुगतना पड़ा और एक कार्यक्रम में उन्हीं गुंडों ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी. कहा जाता है कि इस हादसे पर मायावती भी खूब रोयीं थीं.

अभी कुछ दिन पहले भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह ने गलती से अपने बयान में मायावती के बारे में आपत्तिजनक टिपण्णी की और उसके तुरंत बाद टीवी चैनलों के माध्यम से अपनी बात के लिए कई बार माफ़ी भी मांगी और भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें तत्काल 6 वर्षों के लिए पार्टी से निष्कासित भी कर दिया. लेकिन मायावती विशाल ह्रदय नहीं दिखा सकीं, उन्होंने राज्यसभा में दयाशंकर सिंह की 12 साल की बेटी, बहन, माँ और पत्नी को इस मैदान में घसीट डाला और खुद एक महिला होने के बावजूद इन सबके ऊपर गलत बयानबाजी की. मामला यहीं नहीं थमा, बसपा के बड़े बड़े नेता लखनऊ में प्रदर्शन किये और 12 वर्ष की बच्ची सहित परिवार की सभी महिलाओं को पेश करने की मांग करने लगे, पेश कराके वो क्या करते ये इन लोगों ने साफ़ नहीं किया.  नसीमुद्दीन सिद्दीकी उम्र में इतने बड़े होने के बावजूद भद्दी टिप्पणियां करने से नहीं चूके और मायावती ने इनके ऊपर कोई कार्यवाही नहीं की. मायावती ने अपने आपको दलितों की देवी भी बता दिया लेकिन इस देवी के कुकृत्यों के कारण आज दयाशंकर सिंह की पत्नी स्वाति सिंह न्याय की मांग कर रही हैं लेकिन इस उत्तर प्रदेश के गुंडाराज में तो न्याय शब्द एक फीकी चाय की तरह ही है.

मेरे मन का पाप कहता है कि काश 21 साल पहले ब्रह्मदत्त द्विवेदी ने अपने मानव धर्म का पालन न किया होता, लेकिन क्या करें, हम जिसे धर्म मानते हैं उसे ये खोखली जातिवादी राजनीति करने वाले मौका मानते हैं, इनके लिए सबकुछ वोटबैंक हैं और इनके सभी रिश्ते EVM मशीन का बटन दबने के साथ ही खत्म भी हो जाते हैं और हम में से कई इन्हें देवी मान भी लेते हैं.

ये तो आपको तय करना है कि महिलाओं का सम्मान किसके के लिए धर्म है और किसके लिए दिखावा, और बताते चलें एक की देवी मायवती है और एक देवी माँ भारती.

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